तुम कहाँ हो ?हम तुम्हें ढूंढा करते हैं...
हर ख़ुशी के क्षण..
तुम्हें याद कर लिया करते हैं !
काश ! मै यह जान पाता !
तुम भी मेरी तरह सपने देखा करती हो
चाँद को धरती पर लाने की कोशिश किया करती हो !
बिछी पलकें ,निराश मन !
तेरे ही इंतज़ार में व्यस्त है !
ना जाने कब किस दिशा से..?
दोस्ती का हाँथ बढ़ाती हो !
बादलों की ओट पीछे क्या तू ही शर्माती हो ?
चुपके से कह दो न कब तलक तू आती हो..?
मेरे जीवन का बस यही सार ...
तुझे ढूँढ़ लाऊंगा चाहे , मुझे क्यों न जाना पड़े...
*****सात पहाड़ों के पार********
@Vikas Mehta
1 comment:
Hello Vikas,
thanks for your beautiful poem.weldone!
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